शादी का अपना एक अलग ही माहौल एवं संगीत होता है। शादी की तैयारियों में पूरा घर एवं नजदीकी रिश्तेदार जुटे होते हैं। शादी के खास मौके तथा अन्य रस्मों पर क्या पहना जाए, कौन-सा हेयर स्टाइल बनाया जाए, बारातियों से तथा जीजा से कौन सी शरारत की जाए या लड़की वालों की शरारत का कैसे जवाब दिया जाए। जहां किशोरों में बहस हो रही होती है, तो वहीं युवा दुल्हन की कई तैयारियों में जुट जाते हैं। कोई साथ जाने वाले सामान को सहेज रहा होता है, तो कोई बारात के स्वागत की तैयारी में जुटा होता है। किसी की जिम्मेदारी दुल्हन को ब्यूटी पार्लर लेकर जाने की होती है, तो कोई उसे शॉपिंग कराने में व्यस्त होता है। घर के छोटे-बड़े सदस्य जहां शादी की तैयारियों में व्यस्त होते हैं वहीं दूल्हा-दुल्हन के मन में भावनाओं की अलग ही कशमकश चल रही होती है। बचपन से साथ चल रहे रिश्तों का प्यार देख कर जहां आंखें छलक आती हैं, वहीं शादी के बाद जुडऩे वाले नए रिश्ते दूल्हा-दुल्हन को कभी डराते, कभी गुदगुदाते तो कभी स्नेह से भर देते हैं।
शादी के पैकेज में रिश्ते भी
इसे पढ़कर भले ही आपको हैरत हो परंतु शादी के पैकेज में रिश्ते भी दूल्हा और दुल्हन को मिलते हैं और पैकेज के ये कुछ रिश्ते अपने साथ हंसी-मजाक और छेड़-छाड़ लेकर आते हैं। इन रिश्तों में दोस्ती भी होती है और प्यार भरी तानाकशी भी। इन रिश्तों में साले-साली और ननद-देवर का प्यारा सा रिश्ता होता है। इसके अलावा कुछ ऐसे रिश्ते भी होते हैं जो आपसे आदर-सम्मान मांगते हैं। इनमें से कुछ स्नेहमयी होते हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातों में मीन मेख निकालने वाले।ये ऐसे रिश्ते हैं जिनका दिल आप अपनी सेवा और मधुर वाणी से ही जीत सकते हैं। इन रिश्तों में सास-ससुर एवं उनके हम उम्र रिश्तेदारों को रखा जा सकता है।
दिल बहलाते रिश्ते
शादी के बाद ससुराल में जब दुल्हन का दिल नहीं लगता तो ननद और देवर ही उसका दिल बहलाते हैं। पुनीता ने राज से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद ससुराल वालों ने उसे स्वीकार नहीं किया। तो वे अलग घर में रहने लगे। एक दिन उसका देवर प्रेम आकर उसे घर ले गया और सबसे बोला कि यह हमारी भाभी हैं, आज का लंच हम इनके हाथ का करेंगे। लंच पर उसके बनाए पकवानों की सास-ससुर ने भी तारीफ की तथा उसके मधुर व्यवहार ने एक ही दिन में देवर की मदद से सब का दिल जीत लिया। फिर क्या था सास ने उसे घर लौट आने का आदेश दिया और वह अपने परिवार में धीरे-धीरे सब की चहेती बन गई और देवर के रूप में उसे छोटा भाई मिल गया। राधिका के पति आर्मी में थे इसलिए शादी के बाद जल्द ही अपनी ड्यूटी पर लौट गए तो उसका अकेलापन सहेली बन कर उसकी ननद सुलेखा ने बांट लिया। वह उसके साथ गप्पें लड़ाती, उसे मूवी दिखाने और शॉपिंग कराने ले जाती। इस प्रकार राधिका को कभी लगा ही नहीं कि वह अपने घर से या पति से दूर है।

बड़े संभालें हर बात
शादी के बाद जब नए रिश्तों की दहलीज पर युवा दम्पति कदम रखते हैं तो उनके ख्वाबों का अपना ही संसार होता है। जहां कोई समस्या तो होती ही नहीं। उन्हें लगता है कि हर तरफ रोमांस की ही बहार होगी,परंतु कई बार परिस्थितियां विपरीत भी हो जाती हैं। प्यार के पलों के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। कई बार अपने नादानी भरे व्यवहार से लड़की या लड़का बात को बिगाड़ लेते हैं, तो कभी परिवार वालों का व्यवहार रूखा हो जाता है।
मन में नए रिश्तों का डर एक-दूसरे से घुलने-मिलने में संकोच पैदा करता है। कभी नई दुल्हन परिवार से सामंजस्य नहीं बैठा पाती तो कभी दूल्हे मियां अपने ससुराल वालों के साथ रिजर्व हो जाते हैं। ऐसे में घर के बड़े बुजुर्ग न केवल उनके मन के डर को अपने प्यार से दूर करते हैं बल्कि यदि उनमें कोई दूरी आ जाती है, तो उसका भी वही समाधान निकालते हैं।

गठबंधन परिवारों का भी
शादी का गठबंधन दूल्हा और दुल्हन में ही नहीं बल्कि दो परिवारों में भी होता है। दो अजनबी जिंदगियों को नजदीक लाते हैं दो परिवार, परंतु यह भी सच है कि पूरा जीवन जिन दो लोगों को एक साथ बिताना है उनकी पसंद और नापसंद को भी अहमियत देनी जरूरी है। इसलिए दोनों ही परिवारों को उन्हें निर्णय लेने की छूट देनी चाहिए न कि हर समय उन पर अपने फैसले थोपने की कोशिश करनी चाहिए।अब उनकी अपनी जिम्मेदारियां भी बढ़ रही होती हैं, तो हमसफर बन कर उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को न केवल सांझा करना होगा, बल्कि हर रिश्ते को अपने साथ लेकर चलना होगा। वे रिश्ते जो शादी के बाद एक दूसरे से जुड़ते हैं बेहद नाजुक डोर से बंधे होते हैं। उन्हें संभालने के लिए उतनी ही संवेदना भी चाहिए। क्योंकि हर रिश्ता आपसे प्यार और देखभाल मांगता है। यदि आपने उन्हें प्यार से संवार लिया तो यकीन मानें हर रिश्ता आपके लिए प्यार और स्नेह की मधुर सौगात स्वयं ही ले आएगा।