जो सबकी सुरक्षा करते हैं उनकी रक्षा के प्रति प्रशासन लापरवाह क्यों ?

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जीवन उत्साह संवाददाता: वैसे तो प्रशासन की लापरवाही के किस्से सुनना कोई बड़ी बात नहीं। परंतु प्रशासन अपने ही अधिकारियों को मूलभूत सुविधाएं देने में फिसड्डी साबित हो रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं मैहरे बस स्टैंड की, जहां पूरा दिन ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु करने के लिए बड़सर थाना के पुलिसकर्मी अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। ऐसे में पुलिस कर्मियों  मेहनत के बावजूद भी उन्हें खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जानकारी के लिए बता दें कि मैहरे बस स्टैंड पर एक पुलिस बूथ बना था जो पिछले दिनों किसी गाड़ी वाले द्वारा तोड़ दिया गया था। इस बूथ में पुलिसकर्मी बारिश और धूप से खुद का बचाव करते थे। किंतु बूथ टूटने के बाद प्रशासन ने दोबारा बूथ बनाने की बजाए बहां टिननुमा एक शैड डाल दिया जिसका न तो बारिश में  कोई फायदा है और ना ही  वह धूप को रोक सकता है। वहां खड़े होने की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रशासन की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। थाने के अंतर्गत जितने भी अस्थाई थाने आते हैं उनमें भी पुलिस कर्मियों के लिए बैठने -उठने का कोई उचित प्रबंध नहीं है। यहां तक कि मात्र एक  वैन के सहारे पुलिसकर्मी  थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का दौरा करते हैं। कई बार एक ही समय ज़्यादा घटनाएं होने पर पुलिसकर्मी जैसे-तैसे   करके घटनास्थल पर पहुंच समस्या से निपटते  हैं। बिझड़ी ,गलोड़ में अस्थाई चौकी होने के कारण  बड़सर थाने से ही स्टॉफ भेजना पड़ता है जिससे स्टॉफ की कमी खलती है।
इस संदर्भ  में डीएसपी बड़सर जसबीर सिंह ठाकुर का कहना है कि बड़सर थाने में एक ही वैन उपलब्ध है।  जिससे सभी काम निपटाये जाते हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों को इस समस्या के बारे में जानकारी है और शीघ्र ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा, रही बात मैहरे बस स्टैंड में पुलिस बूथ की ! तो पीडबल्यूडी विभाग बड़सर के अधिकारियों से इस समस्या के बारे में बात हुई थी लेकिन अभी तक कोई हल नहीं हुआ।
इस संदर्भ में पीडबल्यूडी  विभाग बड़सर सहायक अभियंता अनिल शर्मा ने बताया कि पहले बने पुलिस बूथ को कोई  वाहन टक्कर मारकर तोड़ गया  था। यदि उसी जगह दोबारा बना दिया गया तो फिर कोई तोड़ देगा। वहां आसपास कोई उचित जगह नहीं है और न ही इसके लिए कोई बजट उपलब्ध है। इसलिये काम चलाने हेतु  टिननुमा शैड  तैयार किया गया है।
कुल मिलकर यह कहा जा सकता है कि अभी तक प्रशासन किसी भी तरह से इस समस्या का हल निकालने की राह पर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में पुलिस कर्मियों को एक बार फिर से निराशा का सामना करना पड़ेगा। बड़े अचरच की बात है कि प्रशासन अपने अधिकारीयों को भी मूलभूत सुविधाएँ देने में भी फिस्सडी सावित हो रहा है।

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