जो आपके पास नहीं है उसकी चिंता ही क्यों ? आखिर क्या है इस बात की सच्चाई !

जीवन-शैली

अक्सर हम लोगों को देखकर यह शिकायत करते हैं कि काश मुझे भी भगवान ने उतना ही सुखी बनाया होता या हमारे जीवन में भी उतनी खुशियां होती जितना सामने वाला व्यक्ति दिखाई दे रहा है और इस उधेड़बुन में हमारे जीवन में जो सही था उसे भी हम खोने की दिशा में चल पड़ते हैं, क्योंकि हम जिस व्यक्ति को सम्पूर्ण मान रहे हैं अगर उस व्यक्ति से पूछें तो वह भी आपके बारे में यही सोचता होगा कि आप कितने सुखी हैं। जब तक हम उसके बारे में नहीं जानेंगे, तब तक ही वह हमसे श्रेष्ठ प्रतीत होता है, हम यह सोचते हैं कि भगवान ने हमारे साथ ही ऐसा क्यों किया? लेकिन सही में यदि हम ध्यान से देखें तो ऐसा संसार में कोई भी व्यक्ति नहीं जो किसी भी तरह से सम्पूर्ण हो गया हो।
इस संसार में भगवान श्री राम और श्री कृष्ण या फिर किसी भी धरम के गुरु, पीर-पैगम्बर ही क्यों न हों। सबको संसार रुपी समंदर को पार करने के लिए कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा और उन सब ने हमें पहले यह स्वयं करके दिखाया और हमें शिक्षा दी कि इस संसार रुपी समंदर को बिना हाथ -पैर मारे नहीं लांघा जा सकता।
इसलिए मेरा यह मानना है कि जीवन में कभी भी हमें यह सोचाकर निराश नहीं होना चाहिए कि भगवान ने हमें लोगों से कम दिया है या फिर अधूरा दिया है। आपके पास जो भी है अगर उसे ध्यान से देखें तो वह किसी से भी कम नहीं होगा। बशर्ते आप उसकी कीमत को पहचानें। शिकायतों पर ध्यान देने की बजाए जो मिला है उसी को सही ढंग से उपयोग करके आगे बढ़ने की कोशिश अगर की जाये, तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।

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