एक अध्ययन से पता चला है कि 84 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान आयोडीन के महत्व के प्रति जागरूक नहीं होतीं । इनमें से आधी महिलाएं तो आयोडीन से भरपूर खाद्यों को पहचान ही नहीं पातीं । गर्भवती महिलाएं आयोडीन से भरपूर खाद्य जैसे मछली, दूध तथा पनीर का सेवन न करके अपने होने वाले बच्चों का बौद्धिक स्तर नष्ट करती हैं । आयोडीन की जरूरत शरीर में थाइरॉयड हार्मोन्स के निर्माण के लिए होती है,यह बच्चे के दिमाग तथा नाड़ी प्रणाली के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।

आयोडीन की कमी के कारण बच्चे में कम बुद्धिमता तथा बचपन में पढ़ने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं । एक सर्वेक्षण में पाया गया कि ब्रिटेन की अधिकतर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान आम पोषक तत्वों के बारे में जागरूक थीं । इनमें से सिर्फ 12 प्रतिशत महिलाएं ही आयोडीन से संबंधित सलाह के बारे में जागरूक थीं । 84 प्रतिशत महिलाएं इस बात से अनभिज्ञ थीं कि खाने में आयोडीन अजन्मे बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है। केवल 11 प्रतिशत महिलाओं ने अपने डाक्टर या दाई से आयोडीन के बारे में सुना था। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के एक अध्ययन में पाया गया कि तीन-चौथाई महिलाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाए गए प्रतिदिन 250 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन नहीं कर रही थीं। आयोडीन का स्तर गर्भावस्था के दौरान रूटीन तौर पर जांचा नहीं जाता जैसे आयरन का स्तर। ब्रिटेन की डा. एमिली कोमबैट कहती हैं, ‘‘गर्भावस्था तथा जन्म के बाद पहले कुछ महीनों के दौरान आयोडीन बच्चे के दिमागी विकास को सुनिश्चित बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इसके लिए भोजन में आयोडीन से भरपूर दूध, मछली, पनीर, सादा दही, केले, स्ट्रॉबेरीका तथा हरी फलियों का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। महिलाओं को आयोडीन के महत्व के बारे में नहीं बताया जाता जिस कारण वे उन विकल्पों के बारे में नहीं जान सकतीं जिनसे उन्हें आयोडीन की जरूरी मात्रा प्राप्त करने के बारे में पता चले ।’’

इसका एक हल यह भी हो सकता है कि खाने में नमक का सेवन किया जाए परन्तु डा. कोमबैट कहती हैं, ‘‘आयोडीनयुक्त नमक अधिकतर देशों में आम है परन्तु बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया में नमक का इस्तेमाल करने से लोगों में चिंता पैदा हुई है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप को बढ़ाता है ।’’ इसलिए जरूरी है कि महिलाओं को आयोडीन के प्रति जागरूक किया जाए ।