क्या हमारी सोच ही हमारे भविष्य की पूंजी है? या फिर हमारी किस्मत उसकी जिम्मेबार है !

जीवन-शैली

मनुष्य के जीवन का सबसे अहम पहलू उसका भविष्य ही है। हर व्यक्ति भविष्य के लिए चिंतित है। और क्यों न हो ? इंसान ही तो ऐसा प्राणी है जो भविष्य के लिए सोच सकता है। ऐसी शक्ति किसी अन्य प्राणी को भगवान ने नहीं दी है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं, कि क्या किसी पशु ने भी कभी कुछ अच्छा या बुरा सोचा होगा? नहीं न! मनुष्य के इलावा हर प्राणी केवल परिस्थिति के अनुसार ही निर्णय ले सकता है। जैसी परिस्थिति उस प्राणी के सामने आए, उसी के अनुसार वह निर्णय लेकर आगे बढ़ता है और बड़े मजे की बात यह है कि वह अपने द्वारा लिए गए निर्णय पर बाद में खुशी या गम व्यक्त नहीं करता। क्योंकि उसे अपने द्वारा लिए गए निर्णय से कोई फर्क नहीं पड़ता, कि भविष्य में क्या होगा? किंतु उसी के विपरीत यदि मनुष्य की बात की जाए तो वह किसी भी निर्णय को लेने से पहले अपने आगे और पीछे हुए उसके होने वाले प्रभाव का आंकलन कर लेता है या कर सकता है। किंतु क्या सच में ही वह ऐसा कर पाता है या नहीं, एक बड़ा प्रश्न है।
कई अध्ययनों से आज तक यह साबित किया जा चुका है कि मनुष्य वर्तमान में जिस तरह की सोच या निर्णय लेता है, वही निर्णय और सोच उसके भविष्य को तय कर देती है। उदाहरण के तौर पर मैं आपको यदि समझाने की कोशिश करूं तो आपको भूतकाल में ले जाना चाहता हूं।

महाभारत काल में यदि भीष्म को समझा जाए तो उन्होंने अपनी सोच को सामने रखते हुए उस समय की परिस्थिति का आंकलन करते हुए, अपनी माता के शक को विश्वास में बदलते हुए एक प्रण लिया, कि वह हमेशा हस्तिनापुर के दास बन कर अपना जीवन व्यतीत करेंगे और आजीवन ब्रहमचारी रहेंगे। उस समय की सोच और परिस्थिति के अनुसार शायद उनका यह निर्णय बहुत ही न्याय-पूर्ण हो सकता है, किंतु जब महाभारत का युद्ध हुआ तब तक उनका यही निर्णय उनके लिए अभिशाप बन चुका था। वह इतने मजबूर हो गए कि उन्हें अधर्म के साथ रहकर धर्म के विरुद्ध लड़ना पड़ा और उन्होंने स्वयं को ऐसे संकल्प में बांध रखा जिसके कारण वह अमर होते हुए भी मृत्यु की गोद में जाने के लिए मजबूर हो गए अर्थात मनुष्य की सोच और निर्णय समय के साथ बदलते रहने से उसमें नई ऊर्जा आती है। एक ही सोच और एक ही निर्णय यदि हम रखकर जीवन में चलने का प्रयास करते हैं, तो वही सोच और निर्णय हमें भविष्य में गलत साबित होते हुए जब प्रतीत होते हैं। तब हम निराशा में घिर जाते हैं और स्वयं को या स्वयं द्वारा लिए गए फैसलों को ही गलत मानना शुरू कर देते हैं। यह हमारी सबसे बड़ी भूल होती है। दोस्तों आप कभी भी अपने निर्णय को गलत न समझें, बल्कि जब भी आपको किसी निर्णय के बारे में यह लगने लगे कि गलत ले लिया गया था, उसी समय बदलने के लिए तैयार हो जाएं। आप देखेंगे कि थोड़े दिन तो आपको मुश्किल होगी। परंतु बाद में आपको रास्ता साफ दिखाई देने लग जाएगा। सही सोच और सही नज़रिया रखते हुए लिए गए निर्णय आपको जिंदगी में आगे बढ़ाने में पूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसा मेरा विश्वास है। भगवान आपको यह सब करने की शक्ति दें तथा आपको अच्छे लोगों का साथ मिले। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप यूं ही हमारे साथ बने रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *