आज मैं आपको जीवन का एक सबसे गहरा राज बताने का प्रयास कर रहा हूं। हो सकता है कि आज आपको यह बात थोड़ी प्रमाणिक न लगे ,किंतु यह अटल सत्य है कि आप अपने जीवन में हर व्यक्ति को खुश नहीं कर सकते। क्योंकि कई बार हम सही और गलत की ऐसी उधेड़ बुन में उलझ जाते हैं कि हम यह समझ नहीं पाते कि आखिर कैसे हर व्यक्ति से सही संबंध निभाए जाएं। दोस्तों जब भी आप अपने जीवन में हर व्यक्ति को खुश करने के लिए संबंध निभाते रहेंगे। तब तक आप हमेशा परेशान रहेंगे और आप हमेशा उसी के इर्द-गिर्द घूम कर अपना समय खराब करते रहेंगे। इससे अच्छा है कि यदि कोई व्यक्ति आपसे खुश नहीं है तो उसे उसके हाल पर छोड़कर आगे बढ़ें। क्योंकि यदि कोई रिश्ता आपके जीवन में फर्क डालता है तो वह है हमारा परिवार या समाज। केवल इन्ही रिश्तों को हमें निभाना या रुठने मनाने का प्रयास करना चाहिए। न कि उन लोगों को जिनसे हमें रिश्ता स्वार्थवश निभाने की चाहत होती है।

क्योंकि उन को खुश करने के चक्कर में आप उन्हें भी खो देंगे जो आपके जीवन में अहम होते हैं। दुनिया किसी के बिना रुकती नहीं है। उदाहरण के तौर पर किसी भी ऐसी वस्तु को घर में रखना, कि शायद भविष्य में काम आए। केवल गंदगी को इकट्ठा करना मात्र है। इसलिए असली रिश्ते वह हैं जो हमेशा हमारे सुख और दुख में साथ हों। केवल समय व्यतीत करने वाले रिश्तों को टूटने से हमें कभी घबराना नहीं चाहिए। वह तो हमारी मंजिल के रास्ते में आने वाले मील पत्थर मात्र हैं। जो अगले मील पत्थर के आने के बाद अपनी पहचान खो देते हैं। यदि आप उनकी याद में स्वयं को परेशान करते रहेंगे तो आप अपने जीवन में अपनी मंजिल पर कभी भी नहीं पहुंच सकते। इसलिए यदि आपको लगता है कि यह रिश्ता आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है तो उसे टूटने से बचाएं। किंतु यदि आपकी भरपूर कोशिश के बाद भी वह रिश्ता नहीं सुधरे, तो आप अपना समय व्यर्थ न करें। बल्कि आगे बढ़कर अपने जीवन की सफलता के लिए काम करें। क्योंकि आपकी सफलता ही आपके रिश्तों को नई पहचान दे सकती है। परन्तु याद रहे कि किस रिश्ते की क्या अहमियत है। यह मुझ से पहले आपको जरुर पता होगी। इसलिए सचेत रहें और भावुक होकर फैसला न लें। आपका जीवन मंगलमय हो।